वह समय भी आयेगा

वह समय भी आयेगा -
जब गलियाँ सुनसान ना होंगी
बसंत यूँ वीरान ना होगी
बंदी की दरकार ना होगी
श्वासों की रार ना होगी !!
वह समय भी आयेगा -
जब दोस्तों की बैठक होगी
गरम चाय की चषक होगी
जब हर कहानी दोहरी होगी 
घावों की मरहम-पट्टी होगी
पिछले संताप की तपन होगी
नव ठहाकों की आवन होगी !!
वह समय भी आयेगा -
जब शवों का ढेर ना होगा
स्वप्नों का बस अवशेष ना होगा 
भय का घोर अंधेर ना होगा
यह विनाश का त्रास ना होगा !!
वह समय भी आयेगा -
जब सुंदर पुलकित बातें होंगी
वही मनोरम दिन-रातें होंगी 
भोर की मीठी तान होगी 
जीवन पुनः एक गान होगी !!
                                अनिशा पांडेय

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